संयुक्त राष्ट्र ने साल 1948 में 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस घोषित किया था जिसका उद्देश्य विश्वभर के लोगों का ध्यान मानवाधिकारों की ओर आकर्षित करना था. भारत में 28 सितंबर 1993 को मानवाधिकार कानून बनाया गया. इसके बाद भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 1993 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया.
मानवाधिकार वे मूलभूत नैसर्गिक अधिकार हैं जिनसे मनुष्य को नस्ल, जाति, राष्ट्रीयता, धर्म, लिंग आदि के आधार पर वंचित या प्रताड़ित नहीं किया जा सकता. इसके अनुसार सभी को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार जन्मजात ही प्राप्त है और उसे छीनना या बाधा पहुंचाना मानवाधिकारों का हनन होता है.
48 देशों ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली के साथ इस दिन को मनाया. इस दिन को मनाने का उद्देश्य दुनिया में सभी लोगों के लिए एक समान मानकों को स्थापित करना था. साथ ही मानवता के खिलाफ हो रहे जुल्म और सितम को रोकने के लिए एक वैश्विक प्रयास था.